Uppsc: Apply Scaling Or Remove Optional Subject In Pcs – यूपीपीएससी : पीसीएस में स्केलिंग लागू करें या वैकल्पिक विषय हटाएं

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पीसीएस की मुख्य परीक्षा में स्केलिंग हटाए जाने और सफलता के मानक में बदलाव का मुद्दा फिर गरमाने लगा है। पीसीएस-2021 की प्रारंभिक परीक्षा इस साल 24 को अक्तूबर को और मुख्य परीक्षा अगले साल 28 जनवरी से प्रस्तावित है। अभ्यर्थी मांग कर रहा है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा में स्केलिंग लागू होगी या नहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएसससी) यह स्पष्ट करे। साथ ही प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थियों की सफलता के लिए पूर्व निर्धारित मानक को ही लागू किया जाए।

पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा के परिणाम में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। यूपी औरख्खासतौर पर पूर्वांचल के अभ्यर्थियों के चयन का ग्राफ तेजी से गिरा है। हिंदी पट्टी और मानविकी के अभ्यर्थियों के चयन में भी कमी देखने को मिली है। इन सबके पीछे  प्रमुख कारण स्केलिंग को माना जा रहा है।

अभ्यर्थियों का दावा है कि आयोग ने पीसीएस मुख्य परीक्षा में स्केलिंग को समाप्त कर दिया है, जिसकी वजह से साइंस स्ट्रीम के अभ्यर्थियों को अधिक अंक मिल रहे हैं और मानविकी के अभ्यर्थियों के चयन का ग्राफ तेजी से नीचे जा रहा है। अभ्यर्थियों को कहना है कि पूर्व के परिणामों की टॉपरों की लिस्ट में हिंदी पट्टी एवं मानविकी के अभ्यर्थियों का दबदबा रहता था और अब ऐसे अभ्यर्थी पीसीएस के तहत एसडीएम, डिप्टी एसपी जैसे उच्च पदों पर चयन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि स्केलिग को पुन: लागू किया जाएगा या नहीं, यह आयोग के अध्यक्ष स्पष्ट करें। अभ्यर्थियों ने इस मसले पर आयोग के अध्यक्ष से मिलने के लिए समय मांगा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर आयोग स्केलिंग लागू नहीं करता है तो अन्य राज्यों की तरह वैकल्पिक विषयों का पेपर हटाकर उत्तर प्रदेश पर आधारित सामान्य अध्ययन का पेपर शामिल किया जाए, ताकि सभी अभ्र्थियों को चयन के लिए एक समान अवसर मिल सके।

दूसरा मुद्दा सफलता के मानक को लेकर है। प्रतियोगी छात्रों की मांग है कि पूर्व की भांति प्री में पदों की संख्या के मुकाबले 18 गुना और मेंस में तीन गुना अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया जाए, जिसे घटाकर अब क्रमश: 13 एवं दो गुना कर दिया गया है। प्रतियोगियों का यह सुझाव भी है कि प्री में शामिल होने कुल अभ्यर्थियों में से दस फीसदी को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया जा सकता है। यह व्यवस्था भी कुछ अन्य राज्यों में लागू है।

ओवरएज अभ्यर्थियों के मामले में नहीं हो सका निर्णय

आवेरएज अभ्यर्थियों को पीसीएस परीक्षा में दो अतिरिक्त अवसर दिए जाने की मांग पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पीसीएस-2018 से परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया गया, जिसकी वजह से तैयारी प्रभावित हुई। इसके बाद कोविड के कारण परीक्षा की तैयारी प्रभावित हुई। इस बीच बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ओवरएज हो गए। ऐसे अभ्यर्थियों को पीसीएस परीक्षा में शामिल होने के लिए दो अतिरिक्त अवसर मिलने चाहिए।

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पीसीएस की मुख्य परीक्षा में स्केलिंग हटाए जाने और सफलता के मानक में बदलाव का मुद्दा फिर गरमाने लगा है। पीसीएस-2021 की प्रारंभिक परीक्षा इस साल 24 को अक्तूबर को और मुख्य परीक्षा अगले साल 28 जनवरी से प्रस्तावित है। अभ्यर्थी मांग कर रहा है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा में स्केलिंग लागू होगी या नहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएसससी) यह स्पष्ट करे। साथ ही प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थियों की सफलता के लिए पूर्व निर्धारित मानक को ही लागू किया जाए।

पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा के परिणाम में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। यूपी औरख्खासतौर पर पूर्वांचल के अभ्यर्थियों के चयन का ग्राफ तेजी से गिरा है। हिंदी पट्टी और मानविकी के अभ्यर्थियों के चयन में भी कमी देखने को मिली है। इन सबके पीछे  प्रमुख कारण स्केलिंग को माना जा रहा है।

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