No Seats In Special Trains From Varanasi, Migrants Going To New Delhi And Mumbai By Buses – यात्री परेशान: स्पेशल ट्रेनों में सीटें नहीं, बसों से नई दिल्ली और मुंबई जा रहे प्रवासी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: हरि User
Updated Sat, 03 Jul 2021 01:03 AM IST

सार

वाराणसी से नई दिल्ली, मुंबई, सूरत, गुजरात, अहमदाबाद, हैदराबाद की ओर जाने वाली स्पेशल ट्रेनों में जुलाई पखवारे भर तक सीटें खाली नहीं हैं। वेटिंग टिकट पर सफर की अनुमति नहीं होने के कारण यात्री अब बसों से मंजिल तय कर रहे हैं।
 

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कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद रेलवे स्टेशनों पर प्रवासियों की भीड़ बढ़ गई है। इस कदर भीड़ है कि वाराणसी से नई दिल्ली, मुंबई, सूरत, गुजरात, अहमदाबाद, हैदराबाद की ओर जाने वाली स्पेशल ट्रेनों में जुलाई पखवारे भर तक सीटें खाली नहीं हैं। वेटिंग टिकट पर सफर की अनुमति नहीं होने के कारण अब बसों से मंजिल तय कर रहे हैं। कुछ कंपनियों की ओर से बसें भी भेजी जा रही हैं, जिसमें यात्री सवार होकर दिल्ली, मुंबई और गुजरात निकल रहे हैं। ट्रेनों में बेटिकट यात्रियों के पकड़े जाने के केस संख्या भी बढ़ गई है। जुर्माना देकर प्रवासी अपने कर्म भूमि की ओर लौट रहे हैं।

पूर्वांचल भर के विभिन्न जिलों से प्रवासी मुंबई, दिल्ली, सूरत, गुजरात आदि शहरों को जाने के लिए कैंट स्टेशन ही पहुंच रहे हैं। ऐसे में स्टेशन पर प्रवासियों की ऐसी भीड़ उमड़ रही है कि यात्री हाल कम पड़ जा रहे हैं और उत्तर रेलवे के कैंट और पूर्वोत्तर रेलवे स्टेशन के मंडुवाडीह स्टेशन पर खुले आसमान के नीचे यात्री समय गुजार रहे हैं। जिन यात्रियों को ट्रेनों में जगह नहीं मिल रही है तो उन्हें कैंट रोडवेज के आसपास और लहरतारा से कई बसें मिल जा रही हैं। दिल्ली का दो से तीन हजार किराया तो वहीं महाराष्ट्र के लिए पांच से सात हजार रुपये प्रति यात्री लिए जा रहे हैं।

सूरत और अहमदाबाद के लिए तो दस से बारह हजार रुपये तक निजी बस संचालक वसूल रहे हैं। लहरतारा के एक ट्रैवेल संचालक ने बताया कि गुजरात और अहमदाबाद के लिए बसें तभी चल रही हैं जब समूह में एक साथ 25 से 30 यात्री मिल रहे हैं। जौनपुर के बृजेश मिश्रा ने बताया कि मुंबई स्थित मलाड में एक कंपनी में सुपरवाइर का काम करता था, दूसरी लहर में घर आया लेकिन अब कंपनी की ओर से लगातार बुलाया जा रहा है। ट्रेन में कंफर्म सीट के लिए हफ्ते भर जूझे, टिकट नहीं मिला तो बस से महाराष्ट्र गए। कुछ इसी तरह सुदीप्त मणि त्रिपाठी ने भी महाराष्ट्र का सफर तय किया। 

प्रवासियों की भीड़ का फायदा दलाल भी उठा रहे हैं। रोडवेज पर पहुंचने वाले यात्रियों को बस संचालकों के कर्मचारी बहला फुसलाकर ले जा रहे हैं। अधिकतर नई दिल्ली और आगरा, कानपुर के यात्रियों को उठाया जा रहा है। इसमें विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। 

सबसे अधिक भीड़ महाराष्ट्र और सूरत जाने वाली ट्रेनों में है। टिकट के लिए मारामारी मची हुई है। कैंट स्टेशन से मुंबई की ओर जाने वाली 01062 जयनगर-एलीटी स्पेशल ट्रेन के सभी श्रेणी में हफ्ते भर तक वेटिंग है। 02194 महानगरी के स्लीपर क्लास में डेढ़ सौ के पार तो वहीं 02168 एलटीटी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन में स्लीपर क्लास में सीट रिग्रेट हो चुकी है। यही हाल 05018 एलटीटी फेस्टिवल ट्रेन की है। कैंट से खुलने वाली 01072 कामायनी स्पेशल ट्रेन के स्लीपर में दो सौ के पार वेटिंग है। नई दिल्ली के लिए चलने वाली डेढ़ दर्जन ट्रेनों में तीन चार ट्रेनों को छोड़ दिया जाए सभी में हफ्ते भर तक वेटिंग है।

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद रेलवे स्टेशनों पर प्रवासियों की भीड़ बढ़ गई है। इस कदर भीड़ है कि वाराणसी से नई दिल्ली, मुंबई, सूरत, गुजरात, अहमदाबाद, हैदराबाद की ओर जाने वाली स्पेशल ट्रेनों में जुलाई पखवारे भर तक सीटें खाली नहीं हैं। वेटिंग टिकट पर सफर की अनुमति नहीं होने के कारण अब बसों से मंजिल तय कर रहे हैं। कुछ कंपनियों की ओर से बसें भी भेजी जा रही हैं, जिसमें यात्री सवार होकर दिल्ली, मुंबई और गुजरात निकल रहे हैं। ट्रेनों में बेटिकट यात्रियों के पकड़े जाने के केस संख्या भी बढ़ गई है। जुर्माना देकर प्रवासी अपने कर्म भूमि की ओर लौट रहे हैं।

पूर्वांचल भर के विभिन्न जिलों से प्रवासी मुंबई, दिल्ली, सूरत, गुजरात आदि शहरों को जाने के लिए कैंट स्टेशन ही पहुंच रहे हैं। ऐसे में स्टेशन पर प्रवासियों की ऐसी भीड़ उमड़ रही है कि यात्री हाल कम पड़ जा रहे हैं और उत्तर रेलवे के कैंट और पूर्वोत्तर रेलवे स्टेशन के मंडुवाडीह स्टेशन पर खुले आसमान के नीचे यात्री समय गुजार रहे हैं। जिन यात्रियों को ट्रेनों में जगह नहीं मिल रही है तो उन्हें कैंट रोडवेज के आसपास और लहरतारा से कई बसें मिल जा रही हैं। दिल्ली का दो से तीन हजार किराया तो वहीं महाराष्ट्र के लिए पांच से सात हजार रुपये प्रति यात्री लिए जा रहे हैं।

सूरत और अहमदाबाद के लिए तो दस से बारह हजार रुपये तक निजी बस संचालक वसूल रहे हैं। लहरतारा के एक ट्रैवेल संचालक ने बताया कि गुजरात और अहमदाबाद के लिए बसें तभी चल रही हैं जब समूह में एक साथ 25 से 30 यात्री मिल रहे हैं। जौनपुर के बृजेश मिश्रा ने बताया कि मुंबई स्थित मलाड में एक कंपनी में सुपरवाइर का काम करता था, दूसरी लहर में घर आया लेकिन अब कंपनी की ओर से लगातार बुलाया जा रहा है। ट्रेन में कंफर्म सीट के लिए हफ्ते भर जूझे, टिकट नहीं मिला तो बस से महाराष्ट्र गए। कुछ इसी तरह सुदीप्त मणि त्रिपाठी ने भी महाराष्ट्र का सफर तय किया। 


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रोडवेज से खींच ले जा रहे यात्री 

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