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सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड

सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड एक सरकारी प्रतिभूति है जो कि सोने के ग्राम मूल्यवर्ग में उपलब्ध है. यह भौतिक सोना का एक विकल्प है. स्कीम खुलने पर निवेशक इन बॉन्ड्स में निवेश करते हैं और इसे परिपक्वता पर भुनाया जाता है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स योजना का प्रबंधन किया जाता है.
बैंक ऑफ़ बड़ौदा अपने ग्राहकों को देश की सभी शाखाओं के माध्यम से सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना में निवेश करने का अवसर प्रदान करता है.

सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड : सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड लाभ

  • डिमैट प्रारुप में धारित गोल्‍ड बॉण्‍ड
  • भौतिक रुप से सोने को रखने का कोई झंझट नहीं
  • रिडेम्पशन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं
  • ऑनलाइन निवेशकों के लिए छूट
  • ऋण के लिए संपार्श्विक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है
  • रिडेम्पसन (मोचन) सोने के प्रचलित मूल्य से संबद्ध

सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड : सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड विशेषताएं

न्यूनतम और अधिकतम निवेश :

इस बॉन्ड में किया जाने वाला न्यूनतम निवेश 1 ग्राम है. प्रत्येक व्यक्ति या हिन्दू अविभक्त परिवार (HUF) ऐसे बॉन्ड में प्रत्येक वर्ष अधिकतम 4 किलोग्राम तक सोना रख सकता है. ट्रस्टों, धर्मार्थ संस्थानों के लिए, अधिकतम सीमा 20 किलोग्राम है.

निश्चित ब्याज दर :

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर 2.5% वार्षिक की दर से ब्याज अर्जित होता है जिसका भुगतान अर्ध वार्षिक आधार पर किया जाएगा.

कीमतों में पारदर्शिता :

गोल्ड बॉन्ड की कीमतें पारदर्शी होती है क्योंकि वे बाजार में सोने की कीमतों से संबद्ध होती हैं.

निकास विकल्प :

बॉन्ड जारी होने की तारीख के 5 वें वर्ष के बाद निवेशकों के लिए एक निकास विकल्प है. इसकी चुकौती ब्याज भुगतान की अगली तिथि पर की जाएगी.

संयुक्त धारकों और नामितियों की अनुमति है:

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को संयुक्त धारक और नामिति रखने का विकल्प देता है.

स्टॉक एक्सचेंज में व्यापार किए गए बॉन्ड:

डीमैट रूप में धारित बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार के लिए पात्र होंगे.

भुगतान का प्रकार

भारत में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के भुगतान के लिए नकद, मांग ड्राफ्ट, चेक अथवा इंटरनेट बैंकिंग जैसे माध्यम स्वीकार्य है. तथापि, नकदी रु. 20,000/- तक ही स्वीकार की जाएगी.

सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड : सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड 2022-23

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना 2022-23 (सिरीज - I ) : 20 जून 2022 से 24 जून, 2022 तक

एसजीबी - सिरीज - 2022-23-सिरीज I के लिए निर्गम मूल्य रू. 5,091/- प्रति ग्राम है और भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए नाममात्र मूल्य से कम अर्थात इस मूल्य पर रू. 50/- प्रति ग्राम की छूट देने का निर्णय लिया है. ऐसे निवेशकों के लिए निर्गम मूल्य रू. 5,041 प्रति ग्राम होगा.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना 2022-23 (सिरीज -II) 22nd अगस्त 2022 to 26th अगस्त, 2022.

एसजीबी - सिरीज - 2022-23-सिरीज II के लिए निर्गम मूल्य रू. 5,197/- प्रति ग्राम है और भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए नाममात्र मूल्य से कम अर्थात इस मूल्य पर रू. 50/- प्रति ग्राम की छूट देने का निर्णय लिया है. ऐसे निवेशकों के लिए निर्गम मूल्य रू. 5,147 प्रति ग्राम होगा.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2022-23, सिरीज I, II

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई घोषणा के अनुसार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, ट्रेंच I एवं II की अनुसूची निम्न अनुसार है. इसके प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा पूर्व सूचना देकर नीचे दर्शायी गई अवधि से पहले इस योजना को बंद किया जा सकता है.

क्र.सं. ट्रेंच अभिदान की तारीख निर्गम तारीख
1 2022-23- सिरीज I 20 - 24 जून, 2022 28 जून, 2022
2 2022-23 सिरीज II 22 - 26 अगस्त, 2022 30 अगस्त, 2022

निवेश के लिए पात्रता

इस योजना के तहत गोल्ड बॉन्ड्स किसी न्यास, एचयूएफ, चैरिटेबल संस्थान, यूनिवर्सिटी या भारत में रहने वाले किसी व्यक्ति की या नाबालिग बच्चे के लिए अथवा किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्त रूप से लिया जा सकता है.

प्रतिभूति का स्वरूप

यह गोल्ड बॉन्ड्स फॉर्म 'सी' में विनिर्दिष्ट स्टॉक सर्टिफिकेट के रूप में जारी किए जाएंगे.
यह गोल्ड बॉन्ड्स डीमैट स्वरूप में परिवर्तित किए जाने के लिए पात्र होंगे.

आवेदन

शाखाओं द्वारा अभिदान हेतु निर्धारित सप्ताहों में सामान्य बैंकिंग कार्यावधि के दौरान निवेशकों से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे.

निर्गम की तारीख

जारी करने की तारीख उपर्युक्त उल्लिखित विवरण के गोल्ड अकाउंट अनुसार होगी.

मूल्यवर्ग

बॉण्ड का मूल्यवर्ग (डिनॉमिनेशन) एक ग्राम सोना और इसके गुणकों में होगा. बॉण्ड में निवेश की न्यूनतम सीमा एक ग्राम होगी तथा अधिकतम अभिदान सीमा प्रति वित्त वर्ष (अप्रैल–मार्च) व्यक्तियों के लिए 4 किलोग्राम, हिन्दू अविभक्त परिवार(एचयूएफ़) के लिए 4 किलोग्राम और न्यास (ट्रस्ट) और इस तरह की संस्थाएं जो भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी अधिसूचना के अनुसार होगी, के लिए 20 किलोग्राम होगी.

बॉण्ड के अंकित मूल्य पर निर्गम जारी करने की तारीख से प्रति वर्ष 2.5 % की दर (स्थायी दर) से ब्याज का भुगतान किया जाएगा. ब्याज छमाही आधार पर दिया जाएगा तथा अंतिम ब्याज परिपक्वता पर मूलधन के साथ देय होगा.

भुगतान

बॉण्ड जारी होने की तारीख से आठ वर्षों के बाद देय होगा. बॉण्ड के परिपक्वता पूर्व भुगतान की अनुमति इसके जारी होने की तारीख से पांचवे वर्ष से होगी गोल्ड अकाउंट तथा ऐसा भुगतान अगले ब्याज भुगतान की तारीख को किया जाएगा.
बॉण्ड का भुगतान मूल्य भारतीय रुपये में निर्धारित किया जाएगा जो भुगतान की तारीख से पिछले सप्ताह में भारतीय बुलियन एवं ज्वेलर्स संघ लिमिटेड द्वारा अंतिम तीन कार्यदिवस हेतु 999 मार्क शुद्ध सोने के लिए जारी बाजार बंद होने के समय के भाव के साधारण औसत मूल्य पर आधारित होगा.
आरबीआई/ डिपॉजिटरी द्वारा गोल्ड बॉण्ड की परिपक्वता से एक माह पहले निवेशक को परिपक्वता तारीख की सूचना दी जाएगी.
*सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स के एवज में ऋण ऋणदाता बैंक / संस्था के निर्णय के अधीन होगा और यह स्वर्ण गोल्ड बांड धारक के अधिकार के रूप में नहीं माना जाएगा.

कर उपाय

बॉण्ड से अर्जित ब्याज आयकर अधिनियम, 1961 (43 of 1961). के प्रावधानों के अनुसार करयोग्य होगा. व्यक्तियों को स्वर्ण गोल्ड बांड के भुगतान से अर्जित होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर में छूट प्राप्त है. बॉण्ड के हस्तांतरण से किसी को प्राप्त दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ पर सूचकांक लाभ (इन्डेक्सेशन बेनिफिट) प्रदान दिया जाएगा.

संयुक्त धारिता एवं नामांकन

इसमें संयुक्तधारकों तथा नामितियों की (पहले धारक की) अनुमति है. संयुक्त धारिता के मामले में, -4- किलोग्राम की निवेश सीमा केवल प्रथम आवेदक पर लागू होगी.

नामांकन एवं इसका निरस्तीकरण क्रमश: फॉर्म ‘डी’ एवं ‘ई’ में किया जाना चाहिए.

किसी अनिवासी भारतीय को उसके नाम पर किसी मृत निवेशक का नामिति होने पर उसके नाम अंतरित प्रतिभूति मिल सकती है, बशर्तें कि:

  • अनिवासी निवेशक द्वारा निर्धारित समय से पूर्व भुगतान कराने या इसकी परिपक्वता तक प्रतिभूति को धारण आवश्यक होगा; तथा
  • निवेश की ब्याज और परिपक्वता की प्राप्तियां प्रत्यावर्तनीय नहीं होगी.
हस्तांतरणीयता

स्टॉक सर्टिफिकेट के रूप में जारी बॉन्ड्स फार्म ‘एफ’ के अनुसार लिखत (इंस्टूमेंट) के निष्पादन द्वारा हस्तांतरणीय होंगे.

ट्रेडिंग योग्यता

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अधिसूचित तारीख से बॉण्ड ट्रेडिंग के लिए पात्र होगा. (यह नोट किया जाए कि डिपॉजिटरी के साथ केवल डीमैट फॉर्म में रखे गए बॉन्ड्स की ही शेयर बाज़ार में खरीद-बिक्री की जा सकती है).

अपने ग्राहक को जानिए (केवायसी) आवश्यकताएं

प्रत्येक आवेदन आयकर विभाग द्वारा निवेशकों (व्यक्तियों और अन्य संस्थाओं) को जारी किए गए 'पैन विवरण' के साथ होना चाहिए. केवाईसी दस्तावेज जैसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड / पैन या टैन / पासपोर्ट आवश्यक होगा.

निरस्तीकरण

निर्गम के बंद होने तक अर्थात् सब्स्क्रिप्शन के विशिष्ट सप्ताह के दौरान के शुक्रवार तक आवेदन के निरस्तीकरण की अनुमति होगी. गोल्ड बॉन्ड्स खरीदने के लिए प्रस्तुत आवेदन के आंशिक निरस्तीकरण की अनुमति नहीं होगी.

ग्रहणाधिकार चिन्हित करना

इन बॉन्ड्स के सरकारी प्रतिभूति होने के कारण, ग्रहणाधिकार अंकन आदि सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 के मौजूदा नियम एवं कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगा.

भारत में बैंक ऑफ़ बड़ौदा की सभी शाखाएँ स्वर्ण गोल्ड बांड जारी करने के लिए अधिकृत हैं.

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड क्या है? जानें इसके फायदे और निवेश का तरीका

Invest In Digital Gold: आज के समय में सोने में निवेश को सबसे सुरक्षित माना जाता है. गोल्ड के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं.

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड क्या है? जानें इसके फायदे और निवेश का तरीका

आप सोने के जेवर या अन्य सामान खरीदते है, तो उसके चोरी और गुम होने का डर हमेशा बना रहता है. ऐसे में डिजिटल गोल्ड निवेश (Digital Gold Investment) का एक नया और सुरक्षित माध्यम बनकर उभरा है.

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड क्या है? जानें इसके फायदे और निवेश का तरीका

डिजिटल गोल्ड में निवेश करने को लेकर लोगों की रूचि बढ़ी है. इनमें सॉवरेन गोल्ड फंड (Sovereign Gold Bond) और गोल्ड ईटीएफ (Gold Exchange Traded Fund) निवेश के दो प्रमुख माध्यम हैं.

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड क्या है? जानें इसके फायदे और निवेश का तरीका

डिजिटल गोल्ड ऑनलाइन (Digital Gold Online) सोना खरीदने का एक तरीका है. इसमें गोल्ड फिजिकली ना होकर आपके डिजिटल वॉलेट में रखा होगा. आप इसकी खरीदी-बिक्री भी कर सकते हैं. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर कुछ एक्स्ट्रा चार्ज देकर डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड बदल सकते हैं.

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड क्या है? जानें इसके फायदे और निवेश का तरीका

सोने में निवेश के नए विकल्प के तौर पर सॉवरेन गोल्ड गोल्ड अकाउंट बॉन्ड का विकल्प ग्राहकों को 2015 से मिला है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI Bank Gold)जारी करता है. इसमें कम से कम एक ग्राम सोना खरीदा जा सकता है. दरअसल निवेश के नजरिये से फिजिकली सोने की खरीदी में कमी लाने के लिए यह योजना लाई गई है.

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड क्या है? जानें इसके फायदे और निवेश का तरीका

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) पर सालाना 2.5 फीसदी ब्याज मिलता है. ग्राहक ऑनलाइन या कैश के जरिए इसे खरीद सकते हैं. ये 8 साल की अवधि में पूर्ण होती है. इस स्कीम में एक फाइनेंशियल ईयर में एक व्यक्ति अधिकतम 4 किलोग्राम गोल्ड के बॉन्ड खरीद सकता है.

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड क्या है? जानें इसके फायदे और निवेश का तरीका

गोल्ड ईटीएफ को शेयर की तरह खरीदकर डीमैट अकाउंट में रखा जा सकता है. जब आप गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं, तो आपके पास वास्तव में फिजिकल सोना (Physical Gold) नहीं होता है, बल्कि आप सोने की कीमत के बराबर नकद रखते हैं. इसी तरह जब आप गोल्ड ईटीएफ बेचते हैं, तो आपको भौतिक सोना नहीं मिलता है, बल्कि उस समय सोने की कीमत के बराबर नकदी मिलती है.

Tags: Gold Sovereign gold bond Gold ETF 24 carat gold price हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

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गोल्ड इटीएफ (Gold ETF) क्या है | गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में क्या अंतर है

गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में क्या अंतर है?

गोल्ड इटीएफ और गोल्ड बांड की जानकारी- वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के दौरान लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के इस दौर में जमा पर ब्याज दरें तेजी से घटी हैं। पिछले महीनों में देश गोल्ड अकाउंट के कई बड़े बैंकों ने जमा पर ब्याज दरों को घटाया है। इसके साथ ही निवेश से मिलनें वाले रिटर्न में भी भारी कमी आई है। इन सभी के बीच एक ऐसा निवेश उत्पाद है, जिसनें इस बीच बेहतर रिटर्न दिया है और यह है सोना जिसे हम गोल्ड (Gold) कहते है| जिन लोगो नें सोनें में निवेश किया था, उन्हें 40 फीसद तक रिटर्न मिला है। इस समय सोनें की कीमतों में उछाल का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। जिसके कारण इसके निवेशकों का रिटर्न भी बढ़ता जा रहा है। हालाँकि सोने में निवेश के लिए मार्केट में कई विकल्प उपलब्ध हैं, इन्ही में से एक गोल्ड इटीएफ भी है| तो आईये जानते है, गोल्ड इटीएफ (Gold ETF) क्या है, गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में क्या अंतर है?

गोल्ड ईटीएफ क्या है (What Is Gold ETF)

Gold ETF Kya Hai- गोल्ड ईटीएफ अर्थात गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold Exchange Traded Fund) के माध्यम से सोने में निवेश किया जाता है| वर्तमान समय में गोल्ड ईटीएफ की ट्रेडिंग देश के सभी बड़े एक्सचेंज के ऊपर हो रही है| यहां निवेशक इलेक्ट्रॉनिक रुप में सोने में निवेश कर सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ एक्सचेजों पर लिस्टेड होते हैं। यहां इसे डीमेट अकाउंट के जरिए खरीदा और बेचा जा सकता है।

गोल्ड ईटीएफ्स 99.5 फीसद शुद्धता वाला वास्तविक भौतिक सोना खरीद कर अपने एसेट्स बनाते हैं। यह भौतिक सोना बैंकों के संरक्षण में रहता है और सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार समय-समय पर इसका मूल्य लगता है। गोल्ड ईटीएफ का भौतिक रूप से सोना रखना निवेशकों को एक अलग विश्वास देता है। खास बात यह है कि निवेशक भी सोने की भौतिक डिलीवरी ले सकते गोल्ड अकाउंट हैं।

गोल्ड ईटीएफ में निवेश कैसे करते है (How To Invest In Gold ETF)

Gold ETF Me Nivesh Kaise Kare- गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड अर्थात गोल्ड ईटीएफ में निवेशक को निवेश करनें के लिए सबसे पहले ट्रेंडिंग और डीमैट अकाउंट खुलवाना होता है। अकाउंट खुलवानें के बाद ब्रोकर के ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन कर ईटीएफ विकल्प को चुनें। आप जितनी यूनिट खरीदना चाहें, उतनी यूनिट के लिए खरीद का ऑर्डर दे सकते हैं। कुछ समय पश्चात यूनिट्स आपके डिमेट अकाउंट में आ जायेंगे और आपके खाते से पैसा कट जाएगा। निवेशक एकमुश्त या एसआईपी द्वारा भी निवेश कर सकते हैं।

गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में अंतर (Difference Of Gold Bond And Gold ETF)

Gold Bond Aur Gold ETF Me Antar- निवेश के दृष्टिकोण से सोने को हमेशा से निवेश का एक अच्छा साधन माना जाता है| लेकिन अधिकांश लोग भौतिक रूप से सोना खरीदना ही पसंद करते हैं, जैसे ज्वैलरी, कॉइन्स, बिस्किट आदि| यदि हम गोल्ड में निवेश को लेकर बात करे तो गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ भी माध्यम हैं| ऐसे में सोने में निवेश के लिए कौन सा जरिया फायदेमंद है, इसके लिए हम आपको गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड इटीएफ में अंतर बता रहे है, जो इस प्रकार है-

गोल्ड बॉन्ड (Gold Bond)

1. कोई भी व्यक्ति गोल्ड बॉन्ड के रूप में 1 ग्राम से लेकर 4 किलो तक ही सोना खरीद सकते है

2. गोल्ड बॉन्ड में पांच वर्षों का लॉक-इन पीरियड है, इसके बाद ही इसे भुनाया जा सकता है

3. गोल्ड बॉन्ड खरीदने के 3 साल बाद बेचने पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 फीसदी LTCG टैक्स लगता है| यदि तीन वर्ष से पहले विक्रय करते है, तो एप्लीकेबल स्लैब रेट के अनुसार टैक्स लगेगा

4. गोल्ड बॉन्ड पर कैपिटल गेन और ब्याज दोनों का लाभ लिया जा सकता है, साथ ही इस पर सॉवरेन गारंटी भी रहती है

5. गोल्ड बॉन्ड की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसे सेकंडरी मार्केट में बेचने पर लिक्विडिटी का इश्यू आता है

गोल्ड इटीएफ (Gold ETF)

1. गोल्ड इटीएफ के रूप में कोई भी व्यक्ति न्यूनतम 1 ग्राम सोने से लेकर कितना भी निवेश कर सकता है, क्योंकि इसमें कोई अपर लिमिट नहीं है|

2. Gold ETF में कोई लॉक इन पीरियड नहीं है

3. गोल्ड इटीएफ पर भी 3 साल का होल्डिंग पीरियड पूरा करने के बाद बेचने पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 फीसदी LTCG टैक्स लगता है, वहीं 3 साल से पहले बेचने पर एप्लीकेबल स्लैब रेट से टैक्स लगता है

4. Gold ETF में खरीद और बिक्री कभी भी की जा सकती है

5. गोल्ड इटीएफ की सबसे बड़ा माईनस पॉइंट यह है कि डीमैट चार्ज देना अनिवार्य है और कभी-कभी इसका वॉल्यूम बहुत लो रहता है

डीएसपी सैलरी अकाउंट के फायदे | Benefits of DSP Salary account in Hindi

भारतीय स्टेट बैंक में सैन्य कर्मचारियों के लिए जो सैलरी अकाउंट होता है, उसे सेना रक्षा पैकेज (Defence Salary Package) का नाम दिया गया है। इसी को संक्षेप में DSP account कहा जाता है। इस पोस्ट में हम जानेंगे कि डीएसपी अकाउंट के साथ आपको क्या फायदे और सुविधाएं मिलती हैं। Benefits of DSP Salary account in Hindi.

डीएसपी अकाउंट कौन खुलवा सकता है? यह अकाउंट निम्नलिखित कैटेगरी के सैन्य कर्मचारियों के लिए खोला जाता है।

  • भारतीय थल सेना के कर्मचारी
  • भारतीय नौसेना के कर्मसेना
  • भारतीय वायुसेना के कर्मचारी
  • असम रायफल्स (AR) के कर्मचारी
  • राष्ट्रीय रायफल्स (RR) के कर्मचारी
  • जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स (GREF) के कर्मचारी
  • सीमा सड़क संगठन (BRO) के सैन्य कर्मचारी

डीएसपी सैलरी अकाउंट के फायदे | Benefits of DSP Salary account

भारतीय स्टेट बैंक में, सेना रक्षा पैकेज (Defence Salary Package) सैलरी अकाउंट होने पर आपको निम्नलिखित सुविधाएं मिलती हैं-

  • जीरो बैलेंस अकाउंट: खाते में कोई न्यूनतम बैलेंस रखने की शर्त नही। कोई पेनाल्टी नहीं।
  • फ्री असीमित लेन-देन: किसी भी बैंक के एटीएम पर कितने भी निःशुल्क लेन-देन कर सकते हैं।
  • निशुल्क डेबिट कार्ड: सभी सैलरी पैकेज अकाउंट वाले ग्राहकों को के लिए SBI की ओर से निशुल्क डेबिट कार्ड जारी किए जाते हैं। बाद में भी वार्षिक रखरखाव शुल्क नहीं लगता। सैलरी खाते कैटेगरी के आधार पर 4 तरह के डेबिट कार्ड जारी किए जाते हैं-
    • सिल्वर कार्ड: 20,000 रुपए रोज निकालने की सीमा के साथ डोमेस्टिक क्लासिक डेबिट कार्ड
    • गोल्ड कार्ड: 50,000 रुपए रोज निकालने की सीमा के साथ के साथ इंटरनेशनल गोल्ड डेबिट कार्ड
    • डायमंड कार्ड: 50,000 रुपए रोज निकालने की सीमा के साथ इंटरनेशनल गोल्ड डेबिट कार्ड
    • प्लेटिनम कार्ड: 1 लाख रुपए रोज निकालने की सीमा के साथ इंटरनेशनल प्लेटिनम डेबिट कार्ड
    • सस्ता लोन (Home Loans, Car Loans and Education Loans, Xpress Credit) कम ब्याज दरों पर पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन तथा एजुकेशन लोन ले सकते हैं। कार लोन,होम लोन, एक्सप्रेस क्रेडिट पर 100% प्रोसेसिंग शुल्क की छूट मिलती है।
    • 30 लाख का Personal Accident Insurance (Death): सभी रैंकों के गोल्ड अकाउंट सैन्य कर्मचारियों को 30 लाख रु. तक का निःशुल्क वैयक्तिक दुर्घटना बीमा (मृत्यु) किया जाता है। खाताधारक की मृत्यु पर उसके परिवार (नोमिनी) को बीमा की रकम मिलती है। इसके अलावा भी कुछ बीमा सुविधाएं अलग से मिलती हैं-
      • 30 लाख का Personal Accident (Permanent Total Disablement): सभी रैंक के सैनिक कर्मियों के लिए 30 लाख रु. का निःशुल्क वैयक्तिक दुर्घटना (स्थायी पूर्ण विकलांगता ) बीमा किया जाता है। स्थायी रूप से पूर्ण विकलांग होने पर खाताधारक को इसका लाभ मिलता है।
      • 10 लाख का Personal Accident (Permanent Partial Disablement) cover: सभी रैंक के सैनिक कर्मियों के लिए 10 लाख रु. का निःशुल्क वैयक्तिक दुर्घटना (स्थायी आंशिक विकलांगता) बीमा मिलता है। आंशिक रूप से विकलांग होने पर, खाताधारक को इस बीमा का लाभ मिलता है।
      • 1 करोड़ का Air Accident Insurance (Death): सभी रैंकों के सैन्य कर्मचारियों को 1 करोड़ रुपए तक का निःशुल्क वायु दुर्घटना बीमा (मृत्यु) भी किया जाता है। खाताधारक की मृत्यु पर उसके परिवार (नोमिनी) को बीमा की रकम मिलती है।
      • ऑटो स्वीप सुविधा : SBI के DSP salary Account में, 35000 रुपए से अधिक जमा पहुंचने पर यह सुविधा स्टार्ट हो जाती है। इसे E-MOD (बहु विकल्पी जमाएँ) कहा जाता है। Auto-Sweep Facility ऐसी सुविधा होती है, जिसमें एक सीमा से अधिक राशि जमा पहुंचने पर, अतिरिक्त राशि अपने आप FD के रूप में बदल जाती है। इससे आपकी जमा पर ब्याज बढ़कर मिलती है।
      • Demat & Online Trading A/c facility: शेयर बाजार में निवेश के लिए डीमैटअकाउंट तथा ऑनलाइन ट्रेडिंग खाता खुलवाने की सुविधा मिलती है।
      • Multi City Cheques, SMS Alerts. NEFT/RTGS. हर डीएसपी अकाउंट के साथ, मल्टी सिटी चैक, एसएमएस अलर्ट। एनईएफटी/आरटीजीएस, निःशुल्क ड्राफ्ट की सुविधा दी जाती है।
      • Overdraft Facility: दो महीने के वेतन के बराबर ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलती है। यानी की खाते में जमा रकम से अधिक पैसे निकालने की भी सुविधा होती है। ओवरड्राफ्ट की अधिकतम मात्रा आपके पद के आधार पर तय होती है।
      • लॉकर के किराए में छूट: SBI के डीएसपी सैलरी अकाउंट में लॉकर रखने पर वार्षिक किराये में 25% तक की छूट मिलती है।

      ध्यान दे: 18 वर्ष की आयु से पहले नौसेना में शामिल होने वाले नौसेना कर्मचारियों को DSP Account के साथ ओवरड्राफ्ट सुविधा नहीं मिलती। उन्हें वैयक्तिक गोल्ड अकाउंट दुर्घटना बीमा और वायु दुर्घटना बीमा भी नहीं मिलते। क्योंकि 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले खाताधारकों को ही दी जाती हैं।

      डीएसपी अकाउंट के प्रकार | Types of DSP account

      सेना, नौसेना, वायु सेना, असम रायफल्स, आरआर तथा जीआरईएफ (सीमा सड़क संगठन) के कर्मचारियों के रैंक के आधार पर तीन प्रकार के अकाउंट खोले जाते हैं। गोल्ड, डायमंड और प्लैटिनम।

      थल सेना के लिए डीएसपी अकाउंट

      • गोल्डः : जेसीओ तथा अन्य रैंक के अधिकारियों के लिए
      • डायमंडः : लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर रैंक के अधिकारियों के लिए
      • प्लैटिनमः:लेफ्टिनेंट कर्नल, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल, जनरल रैंक के अधिकारियों के लिए

      नौसेना के लिए डीएसपी अकाउंट

      • गोल्डः : सी II, सी I, लीडिंग सीमैन, पेट्टी ऑफिसर, चीफ पेट्टी ऑफिसर, मास्टर चीफ पेट्टी ऑफिसर – II तथा मास्टर चीफ पेट्टी ऑफिसर – I रैंक के अधिकारियों के लिए
      • डायमंडः: सब लेफ्टिनेंट, लेफ्टिनेंट तथा लेफ्टिनेंट कमांडर रैेक के अधिकारियों के लिए
      • प्लैटिनमः:कमांडर, कैप्टन , कमोडोर, रियर एडमिरल, वाइस एडमिरल तथा एडमिरल रैंक के लिए

      वायु सेना के लिए डीएसपी अकाउंट

      • गोल्डः : अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मचारियों के लिए
      • डायमंडः: फ्लाइंग ऑफिसर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट, स्क्वाड्रन लीडर रैंक के लिए
      • प्लैटिनमः विंग कमांडर, ग्रुप कैप्टन , एयर कमोडोर, एयर वाइस मार्शल, एयर मार्शल, एयर चीफ मार्शल रैंक के लिए

      GREF और BRO के लिए DSP अकाउंट

      • गोल्डः: अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मचारियों के लिए
      • डायमंडः: सहायक इंजीनियर/ सहायक प्रशासनिक अधिकारी, सहायक कार्यकारी इंजीनियर / प्रशासनिक अधिकारी / चिकित्सा अधिकारी II, कार्यकारी इंजीनियर / वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी / चिकित्सा अधिकारी के लिए
      • प्लैटिनम: अधीक्षक इंजीनियर/ संयुक्त निदेशक (प्रशासन), अधीक्षक इंजीनियर (चयन ग्रेड) / निदेशक (प्रशासन) , मुख्य इंजीनियर, अपर महानिदेशक, महानिदेशक रैंक के लिए

      असम रायफल्स के लिए डीएसपी अकाउंट

      • गोल्डः : बगलर्स, राईफल मैन एवं MULE ड्राइवर्स, लांस नायक, नलबंद, हवलदार, वारंट ऑफिसर, हवलदार मेजर, नायब सूबेदार, सूबेदार, सूबेदार मेजर रैंक के लिए
      • डायमंडः: डिप्टी कमांडेंट, सहायक कमांडेंट (सेना में लेफ्टिनेंट तथा कैप्टन के समकक्ष)
      • प्लैटिनमः:कमांडेंट, सैकंड-इन-कमांड (सेना में मेजर, ले. कर्नल तथा कर्नल के समकक्ष)। असम रायफल्स में इन स्तरों के अधिकारी थल सेना से प्रतिनियुक्त किए जाते हैं। उनका सेना के हिसाब से डीएसपी अकाउंट होगा।

      राष्ट्रीय रायफल्स के लिए डीएसपी अकाउंट

      राष्ट्रीय रायफल्स में सैन्यकर्मी भारतीय थल सेना से प्रतिनियुक्त किए जाते हैं। इसलिए उनका डीएसपी अकाउंट भी सेना के हिसाब से तय होता है, जैसे कि –

      सोना वायदा(गोल्ड फ्यूचर्स) में निवेश करने से पहले जानने योग्य बातें

      gold and graph

      वायदा अनुबंध भविष्य की तारीख पर एक सहमत मूल्य पर किसी वस्तु को खरीदने या बेचने के लिए एक कानूनी समझौता होता है। मान्यता प्राप्त वायदा अनुबंध मानकीकृत होते हैं और वस्तुओं या वित्तीय साधनों के लिए हो सकते हैं। सोना उन वस्तुओं में से है, जिनका एक्सचेंज-ट्रेडेड, औपचारिक समझौतों के रूप में वायदा अनुबंधों के माध्यम से कारोबार किया जाता है।

      सदियों से सोना सिक्कों, बार और आभूषणों के रूप में खरीदा और बेचा जाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, सोने का कारोबार गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, गोल्ड बॉन्ड, डिजिटल गोल्ड जैसे रूपों में होने लगा है। वायदा बाजार में काम करने वाले निवेशक मोटे तौर पर सट्टेबाज या हेजर्स होते हैं। सट्टेबाज बाजार का जोखिम लाभ कमाने की उम्मीद से लेते हैं, जबकि हेजर्स मूल्य गिरने के जोखिम का प्रबंधन करने के लिए वायदा अनुबंधों में निवेश करते हैं। उद्देश्य चाहे जो हो, वायदा कारोबार केवल वित्तीय और कमोडिटी बाजार के अच्छे ज्ञान वाले निवेशकों द्वारा ही कुशलतापूर्वक किया जा सकता है। यह ज्ञान न केवल उन्हें बाजार जोखिम का प्रबंधन करने में मदद करता है बल्कि वायदा अनुबंध की लागत और विशेषताओं को भी समझने में सहायक होता है।

      भारत में सोने के वायदा कारोबार के विभिन्न पहलू

      भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के माध्यम से सोने का वायदा कारोबार किया जा सकता है। सोने का वायदा कारोबार सोने को भौतिक रूप से लिए बिना सोने में निवेश करना है। सोने के वायदा कारोबार के निवेशकों का उद्देश्य सोना लेना या उसमें निवेश करना नहीं होता। वे अपने जोखिमों को हेज करने के लिए सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव को एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

      सोने के वायदा कारोबार के प्रकार: MCX में सोने का वायदा कारोबार कई आकार के लॉट में होता है। लॉट का आकार आपके लेन-देन की कीमत तय करता है। 1 किलो लॉट आकार के सोने के अलावा, गोल्ड मिनी, गोल्ड पेटल और गोल्ड ग़िनीया अनुबंध हैं जो भारत में वायदा कारोबार में आ सकते हैं। मिनी अनुबंध 100 ग्राम का, गिनीया अनुबंध 8 ग्राम का और पेटल अनुबंध 1 ग्राम सोने का होता है। हालांकि, 1 किलो सोने का ट्रेड लोकप्रिय है, इसलिए यह सबसे ज्यादा लिक्विड है।

      सोने के वायदा कारोबार का अनुबंध: सोने का वायदा कारोबार MCX में उपलब्ध है जो कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च कैलेंडर के अनुसार होता है। वर्तमान में MCX गोल्ड अनुबंध हर दूसरे महीने लॉन्च होता है जिसकी एक्सपायरी 12 महीने की होती है। अनुबंध लॉन्च के महीने की 16 तारीख को शुरु होती है और इसमें एक्सपायरी वाले महीने की 5 तारीख तक कारोबार किया जा सकता है। सोने की बोली 10 ग्राम के लिए लगाई जाती है, जहां ट्रेडिंग इकाई 1 किलो है, और अधिकतम ऑर्डर आकार 10 किलो हो सकता है।

      निपटान(सेटलमेंट) प्रक्रिया: सोने के वायदा कारोबार के अनुबंध में, अनुबंध का निपटान हर महीने की 5 तारीख को किया जाता है। आप या तो अनुबंध का निपटान कर सकते हैं (सोने की डिलीवरी ले सकते हैं) या महीने की 1 तारीख के पहले अपनी स्थिति को स्क्वायर ऑफ कर सकते हैं। यदि आप अनुबंध को निपटाने का विकल्प चुनते हैं तो यह 995 शुद्धता के साथ नंबर किए गए सोने के बार के रूप में होगा।

      मार्जिन: हालांकि वास्तविक मार्जिन में उतार-चढ़ाव हो सकता है, फरवरी 2022 के सोने के अनुबंध में शुरुआती मार्जिन 6% या स्पैन मार्जिन में से जो भी अधिक हो, पर सेट किया गया था। इसका मतलब है कि यदि आपके पास वायदा अनुबंध में 1 लाख रुपए की स्थिति है, तो मार्जिन भुगतान 6,000 रुपए का होगा। मात्र 6,000 रुपए का भुगतान करके 1 लाख रुपए के एक्सपोजर का मतलब अधिक लाभप्रदता की संभावना है। यदि आप अनुबंध का निपटान करते हैं, तो आपको लागू होने वाले करों सहित अंतर्निहित सोने की पूरी कीमत चुकानी होगी।

      भौतिक सोना: MCX में सोने के वायदा कारोबार में भौतिक रूप से सोने को लंदन बुलियन मर्चेंट एसोसिएशन-प्रमाणित रिफाइनरियों द्वारा शुद्धता के लिए प्रमाणित किया जाता है। MMTC-PAMP भारत में ऐसी ही एक LMBA प्रमाणित रिफाइनरी है। सिक्कों सहित सोने को MCX के क्लियरिंग कॉरपोरेशन के COMRIS सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में रखा जा सकता है। डिलीवर किए गए या रखे गए सोने का एक व्यक्तिगत परख प्रमाणपत्र और एक उल्लिखित मेकिंग चार्ज होता है। इस तरह से इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखे गए सोने का कारोबार और लिक्विडेशन आसानी से किया जा सकता है।

      एक उदाहरण के माध्यम से वायदा अनुबंधों को समझना:

      • मान लीजिए कि आप अभी सोने के वायदा अनुबंध में प्रवेश करते हैं। यदि सोने का आखिरी कारोबार मूल्य रु. 50,000 प्रति 10 ग्राम था तो 1 मिनी लॉट के लिए आपके अनुबंध की कीमत रु 50 लाख होगी।
      • MCX टिक आकार या न्यूनतम मूल्य 1 रुपए/ प्रति ग्राम है। तो, इस अनुबंध में, आपको प्रत्येक रुपए में वृद्धि या कमी के साथ 100 रुपये का लाभ या हानि होगी। इस अनुबंध से आपको यही लाभ या हानि होगी।

      सोने के वायदा कारोबार में ट्रेड करने की क्या प्रक्रिया है?

      1. सबसे पहले, आपको MCX में पंजीकृत ब्रोकर के साथ कमोडिटी ट्रेडिंग गोल्ड अकाउंट अकाउंट खोलना होगा। अकाउंट खोलने के लिए एक फॉर्म भरने और बुनियादी KYC दस्तावेज जैसे पहचान और निवास का प्रमाण, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक विवरण आदि प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है।
      2. आपका अकाउंट खुल जाने के बाद, आपको मार्जिन मनी को ब्रोकर के पास एक मार्जिन अकाउंट में जमा करना होगा। सोने के वायदा कारोबार के अनुबंध दस्तावेज में आपको मार्जिन दर मिल जाएगी। यदि ट्रेडिंग में घाटे के कारण आपकी प्रारंभिक मार्जिन राशि कम हो जाती है, तो आपको एक रखरखाव मार्जिन राशि जमा करना होगा। यह वह राशि है जिसका भुगतान करना प्रारंभिक मार्जिन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

      इस राशि को जमा करने के बाद आप लॉग इन कर सकते हैं और सोमवार से शुक्रवार तक सोने के वायदा कारोबार में सुबह 9 बजे से रात के 11:30 बजे के बीच ट्रेड कर सकते हैं।

      सोने के वायदा निवेशक को सोने के निवेश, उस पर अर्थव्यवस्था के प्रभाव और सोने के ट्रेडिंग की अच्छी समझ होनी चाहिए। चूंकि वायदा अनुबंध में जोखिम के साथ-साथ लाभ भी काफी अधिक होता है, इसलिए उपरोक्त पहलुओं की गहन समझ की अत्यधिक अनुशंसा की जाती है।

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