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युग्मों की लोकप्रियता के कारण

युग्मों की लोकप्रियता के कारण
बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2020 12:07 AM IST

आपातकालीन युग्म

आपातकालीन युगल ( कोरियाई : 응급 남녀 ; आरआर : eung-geumnamnyeo ; जलाया आपातकालीन आदमी और औरत ) एक 2014 है दक्षिण कोरियाई टेलीविजन श्रृंखला अभिनीत गाने के जी ह्यो और चोई जिन ह्ययक साथ युग्मों की लोकप्रियता के कारण ली पिल मो , चोई यीओ-जिन और क्लारा . [१] [२] यह२४ एपिसोड के लिए २४ जनवरी से ५ अप्रैल २०१४ तक शुक्रवार और शनिवार को २०:४० बजेकेबल चैनल टीवीएन पर प्रसारित हुआ। रोमांटिक कॉमेडी / चिकित्सा नाटकएक तलाकशुदा जोड़े के बारे में है, जिनकी एक-दूसरे के लिए अशांत भावनाएँ फिर से जागृत हो जाती हैं, जब वे उसी अस्पताल में इंटर्न के रूप में वर्षों बाद फिर से जुड़ जाते हैं । [३]

नाटक की लोकप्रियता के कारण, इसे एक एपिसोड के लिए बढ़ा दिया गया था। नाटक के प्रसारण अधिकार भी 9 देशों को बेचे गए। [४] रिप्लाई विद म्यूजिक - इमरजेंसी कपल शीर्षक वाला एक विशेष म्यूजिक टॉक शो ६ मई २०१४ को दर्शकों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देने के लिए प्रसारित किया गया था। युग्मों की लोकप्रियता के कारण [५]

अपने शुरुआती बिसवां दशा में, एक मेडिकल स्कूल के छात्र, ओह चांग-मिन, और एक आहार विशेषज्ञ, ओह जिन-ही, अपने परिवार के कड़े विरोध के बावजूद प्यार में पड़ जाते हैं और शादी कर लेते हैं। [६] [७] चांग-मिन अमीर, सफल डॉक्टरों के परिवार से आता है, जो मानते हैं कि जिन-ही उसके लिए पर्याप्त नहीं है, जिससे वह उससे शादी करने के बाद उसे आर्थिक रूप से काट देता है। तुरंत पैसा कमाने के लिए, चांग-मिन डॉक्टर बनने का अपना सपना छोड़ देता है, और इसके बजाय एक दवा विक्रेता बन जाता है। वह अपनी नौकरी को लेकर दुखी है, जबकि जिन-ही की हीन भावना और गहरी हो जाती है क्योंकि उसके पति का परिवार उसे नीचा दिखाना जारी रखता है। वे लगातार लड़ने लगते हैं और अंत में तलाक ले लेते हैं। छह साल बाद, चांग-मिन अपने सपने को पूरा करने के लिए मेड स्कूल वापस चला गया, जबकि जिन-ही ने भी खुद को मेड स्कूल के माध्यम से रखा है। वे उसी अस्पताल में इंटर्न के रूप में समाप्त होते हैं , जहां उन्हें तीन महीने के लिए आपातकालीन कक्ष में एक साथ काम करना होगा ।

मुख्य पात्रों

    ओह जिन-ही, प्रशिक्षु के रूप में गीत जी-ह्यो[8][9][10] ओह चांग-मिन, प्रशिक्षु के रूप में चोई जिन-ह्युक[11][12][13] , गूक चेओन-सू के रूप में, आपातकालीन चिकित्सा के उपस्थित चिकित्सक[14] , सर्जरी के सहायक प्रोफेसर शिम जी-हाई के रूप में - हान आह-रेम, प्रशिक्षु [15]
  • यूं जोंग-हून इम योंग-ग्यू के रूप में, इंटर्न

पात्रों का समर्थन

  • पार्क संग-ह्युक के रूप में इम ह्यून-सुंग, इंटर्न और यंग-एई का पति
  • चुन मिन-ही ली यंग-एई, प्रशिक्षु और संग-ह्युक की पत्नी के रूप में
  • चोई बेओम-हो गो जोंग-हून के रूप में, आपातकालीन चिकित्सा के प्रमुख
  • पार्क सुंग-ग्यून के रूप में अहं यंग-पिल, सर्जन
  • जंग डे-इल के रूप में हीओ जे-हो, तीसरे वर्ष निवासी
  • किम मिन-की के रूप में क्वोन मिन, प्रथम वर्ष निवासी
  • किम ह्यून-सूक चोई एमआई-जुंग, ईआर हेड नर्स के रूप में
  • ली सुन-आह के रूप में हीओ यंग-जी, ईआर नर्स
  • सोन ये-सेउल, ईआर नर्स के रूप में चोई यू-रा
  • जो यांग-जा, जिन-ही की मां के रूप में ली मि-यंग
  • जीन सू-जिन ओह जिन-ए के रूप में, जिन-ही की छोटी बहन
  • पार्क डू-शिक किम क्वांग-सू, इंडी गायक और जिन-ए के पति के रूप में
  • पार्क जून-ग्यूम के रूप में यूं सुंग-सूक, चांग-मिन की मां
  • ओह ताए-सोक, चांग-मिन के पिता के रूप में कांग शिन-इल
  • पार्क जी-इल - यूं सुंग-गिल के रूप में, चांग-मिन के चाचा
  • - यूं सुंग-मील के रूप में, चांग-मिन की पहली चाची
  • - यूं सुंग-जा के रूप में, चांग-मिन की दूसरी चाची

कैमियो दिखावे

  • यूं जू-सांग पुजारी के रूप में (ईपी 1 और 14)
  • डॉ. जियोन ह्युंग-सोक के रूप में ली हान-वाई (ईपी 1)
  • अस्पताल के निदेशक के रूप में जीन सू-क्यूंग (ईपी 1)
  • बंदूक के साथ नशे में धुत रोगी के रूप में यूं बोंग-गिल (ईपी 2)
  • जंग जू-री चांग-मिन की ब्लाइंड डेट के रूप में (ईपी युग्मों की लोकप्रियता के कारण 3) [16]
  • मिस्टर टैक्सी के रूप में गैरी (ईपी ६) [१७] [१८] [१९] [२०] [२१]
  • डिकपंक्स इंडी बैंड के रूप में (ईपी 6)
  • नाम जंग-ही महिला रोगी के रूप में (ईपी 18-19)
  • महिला रोगी के रूप में नरशा (ईपी 19)
  • पुरुष रोगी के रूप में किम कांग-ह्यून (ईपी 19)
आपातकालीन युगल: मूल साउंडट्रैक
साउंडट्रैक एल्बम द्वारा

यह थाईलैंड में पीपीटीवी एचडी पर 29 अक्टूबर 2014 से 12 जून 2015 को 10:00 बजे प्रसारित होना शुरू हुआ । [२४] यह थाईलैंड, मलेशिया, फिलीपींस, इंडोनेशिया और श्रीलंका में विभिन्न उपशीर्षकों के साथ इफ्लिक्स पर स्ट्रीम करने के लिए भी उपलब्ध है। [25]

लोकप्रिय राम मंदिर से लोकहितकारी रामराज्य तक का सफ़र

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धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक होते हैं। विज्ञान का आधार होता है तर्क और अनुसंधान युग्मों की लोकप्रियता के कारण जबकि धर्म का आधार होता है श्रद्धा और विश्वास। विज्ञान निष्कर्ष निकालता है और धर्म इसे समाज तक पहुंचाता है। दुर्भाग्य से, 21वीं शताब्दी में दुनिया में धर्म और विज्ञान के बीच दूरी बढ़ने लगी है। विज्ञान आवश्यकता से अधिक भौतिकवाद की दिशा में जाता दिख रहा है और धर्म आवश्यकता से अधिक रूढ़िवादी अंधविश्वास की राह पर।

सर्वोच्च न्यायालय आज अयोध्या मामले पर फ़ैसला सुनायेगा। इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2010 में राम जन्मभूमि भूमि/बाबरी मसजिद के स्वामित्व के मामले में विवादित भूमि के त्रिकोणीय स्वामित्व का निर्णय दिया था, जिसमें एक भाग सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को, एक भाग निर्मोही अखाड़े को तथा एक भाग पर रामलला को स्वामित्व दिया गया था।

भारतीय न्यायपालिका के सामने आज यह अवसर है कि वह आस्था बनाम दस्तावेज के बीच से एक को चुनकर ध्रुवीकरण का रास्ता खोले या क़ानून की एक ऐसी न्यायपूर्ण अभिनव परिभाषा दे जिससे विज्ञान एवं धर्म के बीच समन्वय का मार्ग प्रशस्त हो। क्योंकि अयोध्या मामले में एक पक्ष जहां भगवान राम पर आस्था को मुख्य तर्क बनाये हुए है, वहीं दूसरे पक्ष ने ऐतिहासिक प्रमाण को अपना प्रमुख तर्क बनाया है।

रामचंद्र जी को लोग भगवान मानते हैं। वेदों में राम का जिक्र नहीं है, उपनिषदों में से एक में स्वयं रामचंद्र जी के संवाद हैं तथा पुराणों में रामजी पर कई कथाएं हैं। राम दशरथ नंदन थे या दशावतार में से एक, यह धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी भिन्न-भिन्न है। राम पौराणिक पुरुष रहें हो, चाहे ऐतिहासिक पुरुष रहे हों, पर निश्चित रूप से वह मर्यादा पुरुषोत्तम थे। रामायण के 300 से अधिक संस्करण भारत की विभिन्न भाषाओं से लेकर समूचे दक्षिण एशिया तथा जापान तक में प्रचलित हैं।

आख़िर क्या कारण है कि हजारों वर्षों से राम करोड़ों लोगों के दिल में रमे हैं हर धर्म के इतिहास में कई महापुरुषों का वर्णन मिलता है, अधिकाँश महापुरुष बुराई के ख़िलाफ़ विपरीत परिस्थिति में भी जद्दोजहद कर अंततोगत्वा विजय हासिल करते हुए दर्शाये गए हैं। भगवान राम का चरित्र एक ऐसा अविरल चरित्र है, जिसमें बुराई पर जीत के बाद के आगे की भी कथा है जिसमें उन्होंने एक नूतन व्यवस्था का आगाज किया जो उनके देवलोकगमन के बाद भी सुचारू चलती हुई दिखाई देती है। सामान्य भाषा में इसे रामराज्य कहा जाता है।

राम के चरित्र की कुछ विशेषताएं स्वयंस्पष्ट हैं। जैसे राम, परस्पर विरोधी प्रतीत होने वाले युग्मों के बीच तारतम्य बिठाने का उत्तम उदाहरण हैं। स्थूल दृष्टि से देखें तो रामसेतु का निर्माण इसका एक प्रतीक है। नदी पर तो अनेक पुल बने पर सागर के किनारों को पाटने का काम राम ने ही किया।

सूक्ष्म दृष्टि से भी देखें तो दशरथ-विदेह, वशिष्ठ-विश्वामित्र, लक्ष्मण-परशुराम, लक्ष्मण-भरत, बाली-सुग्रीव, विभीषण-रावण, इन सभी पात्रों की सोच, व्यवहार, चाल-चलन एक दूसरे के विरोधी होते हुए भी राम द्वारा इनमें सफलतापूर्वक सामंजस्य बिठाने का प्रयास दर्शाया गया है। अतः परस्पर हितों का टकराव होते हुए भी, उनमें तारतम्य बिठाना राम के चरित्र की विशेषता है। आज 21वीं सदी में भी मानव विकास के इस मुक़ाम पर लोकतंत्र की यही भावना है कि सभी परस्पर विरोधी युग्म कैसे सहजीवन जी सकते हैं। भारत समेत अनेक लोकतांत्रिक देशों के संविधान भी इसी अनेकता में एकता को यथार्थ में बदलने का प्रयास ही तो हैं।

राम बुद्धिनिष्ठ थे, इसका उदाहरण यह है कि राम ने धनुष भंग विश्वामित्र जी के कहने पर किया, भरत मिलन में भरत की बात ही रखी, सुग्रीव से मित्रता हनुमान की सलाह पर की, सीता की खोज सुग्रीव के सुविधानुसार की, सागर का गर्वभंग लक्ष्मण की राय से, सेतु निर्माण समुद्र की सलाह पर और रावण नाभि वध विभीषण के कहने पर किया। आज 21वीं सदी की सभ्य सामाजिक व्यवस्था में भी तो ऐसी ही बुद्धि पर निष्ठा को आदर्श माना गया है, जहां जिसकी लाठी उसकी भैंस के स्थान पर उचित या अनुचित का विचार बहुमत-अल्पमत के द्वारा नहीं लॉजिक से, राय-मशविरे से किये जाने की व्यवस्था बनाई गई है।

राम के लोकप्रिय बनने का सबसे बड़ा कारण उनके द्वारा रामराज्य की स्थापना रही। एक ऐसा राज्य जहां न कोई रोगी होता था, न कोई अनपढ़, न कोई ग़रीब होता, न शोषित। रामायण में रामराज्य का वर्णन करते हुए कहा गया है कि -

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।।

अल्पमृत्यु नहिं कवनिउ पीरा। सब सुंदर सब बिरुज शरीरा।।

नहीं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना।।

सब गुनग्य पंडित सब ज्ञानी। सब कृतग्य नहीं कपट सयानी।।

जिस आदर्श को कवि राम राज्य कहता है, उसमें तो असल में भरत राज्य, अर्थात नंदीग्राम का खड़ाऊं राज्य, अर्थात लोकस्वराज्य की चर्चा है, जिसमें सत्ता व्यक्ति या विशिष्ट व्यक्तियों के हाथ में न होकर सामान्य नागरिकों के हाथ में होती है। राम की अनुपस्थिति और राजा दशरथ की मृत्यु के बावजूद, 14 वर्षों तक अयोध्या में एक भी अप्रिय घटना नहीं घटी क्योंकि भरत ने स्वयं को केवल सुरक्षा एवं न्याय तक सीमित रखा, प्रशासन के चक्कर में नहीं पड़े।

आजकल जब सरकारें रावण की दो प्रिय कभी न ख़त्म होनी वाली परियोजनाएं, जैसे - सागर के पानी को मीठा बनाना और स्वर्ग तक सीढ़ी बनाने जैसे उपक्रमों को ही साध्य मान बैठी हों, वैसे में यदि किसी राम ने लीक से हटकर जनता को मूलभूत सुरक्षा, न्याय, सुविधा तथा स्वतंत्रता देने वाली नूतन व्यवस्था की नींव डाली तो रामराज्य की स्थापना करने वाले उस राम को यदि सैकड़ों पीढ़ियों से करोड़ों लोगों ने आदर्श भगवत स्वरूप माना है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

ऐसे समुद्रवत गंभीर और हिमालय जैसे स्थिर राम को जनप्रतिनिधि राष्ट्रपुरुष मानते हुए ही शायद हमारे संविधान शिल्पियों ने संविधान सभा द्वारा अंगीकृत भारत के मूल संविधान की प्रतियों में राम के चित्र को स्थान दिया।

आदर्श स्थिति यह होगी कि भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका ऐसे संविधान सम्मत राम की विस्तृत व्याख्या करे और उनकी स्मृति में अयोध्या में राम जन्मस्थान पर एक भव्य स्मारक की अनुमति दे, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के स्थान पर विश्वभर की 300 से अधिक रामायणों में उल्लिखित उस प्रगतिशील रामराज्य पर शोध होगा जो अभिनव मानव सभ्यता का इष्ट है और वर्तमान विश्व का मार्गदर्शक भी और इसके नतीजतन भारत को विश्वगुरु की हैसियत दिलवाने वाला भी। रही बात साकार तथा निराकार की उपासना हेतु मंदिर-मसजिद की, तो वे आसपास में हैं भी, नए बनाये भी जा सकते हैं। बाक़ी अंततोगत्वा, अदालत के फ़ैसले को आदर देना हर भारतीय का लोकतांत्रिक फर्ज तो है ही।

मुख्यमन्त्री योगी की कुण्डली पर भविष्यवाणी , योगी पीएम. बनेंगे या सीएम. ही रहेंगे । ( डाँ.अशोक शास्त्री )

मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री ने एक विशेष मुलाकात मे यू. पी. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे मे बडी भविष्य वाणी करते हुए बताया कि सी. एम. योगी की जन्म कुंडली मे लग्नेश सूर्य दशम भाव मे धनेश लाभेश बुध के साथ बुधादित्य योग तथा षष्ठेश सप्तमेश शनि के साथ दशम मे एक और योग बना रहा है । इसी योग के कारण यै अपना घर – बार , जन्म स्थान को छोड़कर गोरखनाथ पीठ के महंत बने ।
डाँ.अशोक शास्त्री ने बताया कि श्री योगी आदित्यनाथ जी का जन्म दिनांक 05 जून 1972 को उत्तराखंड के गढवाल में जन्मे अजय सिंह बिष्ट का गढवाल से गोरखपुर और फिर यूपी के सीएम बनने तक का सफर बहुत रोचक था । गोरखपुर मठ के पूर्व महंत अद्वैयनाथ के संपर्क मे आने के बाद इनके जीवन मे बदलाव आया । योगी जी को आध्यात्मिक झुकाव बचपन से ही था , रही सही कसर महंत अद्वैयनाथ जी के मार्गदर्शन मे पूरा हो गया ।
डाँ.अशोक शास्त्री के मुताबिक राजनीतिक और अध्यात्म दोनो अलग अलग है और दोनो मे ही योगी आदित्यनाथ को महारत और लोकप्रियता प्राप्त हुई । वे गोरखनाथ मठ के मठाधीश के साथ राजनीति मे भी आगे है । ये सब दोनो स्थानों मे राजा जैसी स्थिति , उच्च पद और लोकप्रियता योगी की जन्म कुंडली मे अच्छे युग्म का प्रतिफल है ।
ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री ने बताया कि योगी आदित्यनाथ ( अजय सिंह बिष्ट ) जन्म दिन 05 जून 1972 जन्म समय दोपहर 12:00 अनुमानित ( गुप्त ) जन्म स्थान पंचूर , पौढी गढवाल , उत्तराखंड मे जन्म हुआ । इनकी कुंडली मे सिंह लग्न सूर्य है और राशि स्वामी शनि के साथ केंद्र मे है । योगी की चंद्र राशि कुंभ और जन्म नक्षत्र पूर्वा भाद्रपदा नक्षत्र के द्वितीय चरण मे हुआ है । इन पर वर्तमान मे केतु की महादशा व अंतर्दशा चल रही है । डाँ. शास्त्री ने बताया कि इनकी कुंडली मे गुरु – चंद्रमा की युति योगी की लोकप्रियता का कारक है । इसी कारण देश और राज्य की राजनीतिक मे योगी का ओहदा गुरु – चंद्र की युति सेवन उच्च युग्मों की लोकप्रियता के कारण रहेगा । साथ मंगल के कारण शत्रु भी प्रबल रहेंगे । लेकिन कुंडली मे ग्रहों की अच्छी स्थिति से सितारे बुलंद रहेंगे ।
डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार भारतीय जनता पार्टी से इन्होने अपना पहला चुनाव अपने आध्यात्मिक गुरु और गोरखनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की सीट यानि गोरखपुर से लडा और विजयी हुए फिर इसके बाद पलट कर नही देखा और लगातार 5 बार सांसद रहे । यदि देखा जाए तो योगी आदित्यनाथ की कुंडली मे राज व सन्यास के योग दिखाई देते है । इन ग्रहों की दशा एसी है कि ये सत्ता के पीछे नही बल्कि सत्ता इनके पीछे – पीछे चलती हुई प्रतित होती है ।
ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के मुताबिक यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की कुंडली सिंह लग्न की है । एसे जातक के चेहरे पर हमेशा तेज और चमक रहती है । ऐसे व्यक्ति को समाज मे मान सम्मान के साथ आलोचना अपयश के भी शिकार होते है । योगी की जन्म राशि कुंभ है , स्वामी शनि है जो अपने मित्र शुक्र के घर पिता सूर्य और बुध के साथ केंद्र मे स्थित है । तीन ग्रह एक साथ केंद्र मे बेठने से वह हर तरह के लोगों के संपर्क मे आता है । डाँ. शास्त्री ने बताया कि साथ गुरु बलवान होने के कारण इस कुंडली के जातक को भरपूर मान सम्मान के साथ पूजनीय होता है । केंद्र मे सूर्य होने से जातक राजा सी जिंदगी या राजा का प्रिय होता है । जैसे योगी जी को हर क्षेत्र मे अपने से उच्चस्थ का सानिध्य और सम्मान मिलता रहा है । उदाहरण के लिए योगी पीएम मोदी की टाप लिस्ट मे आते है ।
ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के मुताबिक योगी जी की कुंडली मे शुक्र की महादशा मे शनि की अंतर्दशा चल रही है । शनि कुंडली मे सूर्य के साथ केंद्र मे है , इस कारण पुनः सीएम बनने की पूरी संभावना है , लेकिन पीएम या कहे प्रधान मंत्री बनने की अभी संभावना नही है । लेकिन कुंडली मे ग्रहों के प्रबल योग सीएम योगी को केंद्र मे उच्च पद पर और मुख्य भूमिका मे लेकर आएगा , इसकी पूरी संभावना है ।
योगी को 2022 मे राजनीतिक सफलता के योग
डाँ.अशोक शास्त्री के मुताबिक लग्नेश सूर्य दशम भाव मे धनेश लाभेश बुध के साथ बुधादित्य योग तथा षष्ठेश सप्तमेश शनि के साथ दशम मे एक और युग्मों की लोकप्रियता के कारण योग बना रहा है । इसी योग के कारण ये अपना घर बार , जन्म स्थान को छोड़कर गोरखनाथ पीठ के महंत बने तथा वहां के लगभग 800 करोड धन संपत्ती के संरक्षक है इनमे बडे बडे निर्णय की क्षमता है । इनकी कथनी और करनी मे अंतर नही होता है । ये एक स्पष्टवादी संत है । धनेश लाभेश बुध सूर्य के साथ नयी भूमि भवन का सृजन करता है सुखेश का एकादश भाव मे होना बहुत बडी फ्रेंड फालोइंग देखता है । सुख भाव जनता का भाव है ये योगी आदित्यनाथ को जनता के चहेता बनाता है , इनको जनता का बडा समर्थन और प्रसिद्धि दे रहा है जो चुनाव के दौरान वोट मे लाभ दिलवाती है ।
डाँ. शास्त्री के अनुसार पराक्रमेश राज्येश शुभ लाभ मे भाग्येश सुखेश शुक्र मंगल के साथ दो राजयोग का सृजन कर रहा है ये योग पंचमेश गुरु से दृष्ट है । दशम भाव और एकादश भाव मे राशि परिवर्तन है शुक्र बुध के बीच इस पर और दशम भाव पर गुरु का प्रभाव है इसी राजयोग के कारण गोरखपुर से पांच बार सांसद और फिर उत्तर प्रदेश जैसे बडे राज्य के मुख्य मंत्री बने यह बहुत बडी बात है । पंचमेश अष्टमेश गुरु और राज्येश पराक्रमेश शुक्र भी एक राजयोग का सृजन कर रहा है ।
छठे स्थान का राहु व्यय का केतु राजयोग कारक बन गया है । सुख भाव का एकादश भाव मे गुरु से दृश्य होना व्यक्ति को नई सफलता देता है । जातक की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढती रहती है । छठे स्थान पर मंगल की ओर केतु की दृष्टि विरोधियों और अपराधियों का अंत करने मे सक्षम है । यही योग इनको कडक प्रशासक और नेता बनाता है । इसी योग के चलते पिछले 4 सालों मे उत्तर प्रदेश मे अपराधियों के लगातार एनकाउंटर हुए । और यूपी मे ला एंड आर्डर सुधारा ।
स्वराशि पंचमेश गुरु इनको ज्ञानी बनाता है । गुरु धर्म का कारक है यहां बृहस्पति इनको धर्म से जुड़ाव दे रहा है और मठ प्रमुख बनने मे योगदान दे रहा है ।
क्या योगी जी 2022 मे दुबारा उत्तर युग्मों की लोकप्रियता के कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे या केंद्र मे इनको कोई बडी जिम्मेदारी मिलेगी इस संदर्भ मे डाँ.अशोक शास्त्री ने बताया कि 2022 मे फरवरी-मार्च माह मे यूपी के चुनाव होंगे और रिजल्ट आएगा उस समय इनका केतु शनि बुध का समय चल रहा होगा और शनि बुध दोनो राजयोग कारक है । शनि केतु की महादशा जहां राजकीय विरोधाभास पैदा करेगी । यहां योगी जी का सामना अखिलेश यादव और मायावती कर पाए इसकी संभावना कम है । अतः योगी आदित्यनाथ जी एक बार फिर उत्तर युग्मों की लोकप्रियता के कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे ।

ज्योतिषाचार्य
डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
मो. नं. 9425491351

13 साल बाद मकर राशि में आए बृहस्पति, शनि का प्रभाव घटेगा

Bareily Bureau

बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2020 12:07 AM IST

Rashi parivartan

पीलीभीत। तेरह साल बाद 20 नवंबर को बृहस्पति ने मकर राशि में प्रवेश किया है। बृहस्पति, मकर राशि में पहले से स्वग्रही शनि के साथ संयोग करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण है, मगर इस परिवर्तन का कुछ राशियों पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ेेगा। पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक, बृहस्पति मकर राशि में शनि के साथ संयोग करेंगे। जब कोई भी ग्रह किसी ग्रह के साथ संयोग करता है तो युग्म का फल प्राप्त होता है। अब तक शनि के स्वग्रही होने के कारण लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ रहा था, मगर बृहस्पति के मकर राशि में आने के बाद शनि के अच्छे प्रभाव में कमी आ जाएगी। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ेगा। दांपत्य जीवन पर भी असर पड़ेगा। मधुमेह के रोग में बढ़ोतरी होगी।
राशियों पर कुछ ऐसा रहेगा प्रभाव
मेष: व्यवसाय मेें सावधानी बरतें, प्रेम की स्थिति में उथल पुथल।
वृषभ: भाग्य उत्तम रहेगा, सोच सकारात्मक होगी।
मिथुन: जीवन साथी से मतभेद की स्थिति आ सकती है, शुभता में कमी आएगी।
कर्क: दाम्पत्य जीवन की परेशानियों से छुटकारा, हर दृष्टि से अच्छा समय रहेगा।
सिंह: बच्चों की सेहत पर ध्यान दें, निर्णय लेने की क्षमता में कमी आ सकती है।
कन्या: जीवन में शुभता आएगी, विद्यार्थियों के लिए बेहतर समय होगा।
तुला: मां के स्वास्थ्य पर ध्यान दें, घरेलू मामले में संयम से काम लें।
वृश्चिक: शुभता में कमी आएगी, पराक्रमी बनेंगे और सफलता मिलेगी।
धनु: धनागमन होगा, जीवन में तरक्की और कुटुंब में वृद्धि संभव है।
मकर: अच्छा और बुरा दोनों संयोग बने रहेंगे, स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता।
कुंभ: खर्च की वजह से परेशानी बढ़ेगी, कर्ज लेने की नौबत आ सकती है।
मीन: सफलता मिलेगी, स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत, आर्थिक संपन्नता आएगी।

पीलीभीत। तेरह साल बाद 20 नवंबर को बृहस्पति ने मकर राशि में प्रवेश किया है। बृहस्पति, मकर राशि में पहले से स्वग्रही शनि के साथ संयोग करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण है, मगर इस परिवर्तन का कुछ राशियों पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ेेगा। पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक, बृहस्पति मकर राशि में शनि के साथ संयोग करेंगे। जब कोई भी ग्रह किसी ग्रह के साथ संयोग करता है तो युग्म का फल प्राप्त होता है। अब तक शनि के स्वग्रही होने के कारण लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ रहा था, मगर बृहस्पति के मकर राशि में आने के बाद शनि के अच्छे प्रभाव में कमी आ जाएगी। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ेगा। दांपत्य जीवन पर भी असर पड़ेगा। मधुमेह के रोग में बढ़ोतरी होगी।


राशियों पर कुछ ऐसा रहेगा प्रभाव
मेष: व्यवसाय मेें सावधानी बरतें, प्रेम की स्थिति में उथल पुथल।
वृषभ: भाग्य उत्तम रहेगा, सोच सकारात्मक होगी।
मिथुन: जीवन साथी से मतभेद की स्थिति आ सकती है, शुभता में कमी आएगी।
कर्क: दाम्पत्य जीवन की परेशानियों से छुटकारा, हर दृष्टि से अच्छा समय रहेगा।
सिंह: बच्चों की सेहत पर ध्यान दें, निर्णय लेने की क्षमता में कमी आ सकती है।
कन्या: जीवन में शुभता आएगी, विद्यार्थियों के लिए बेहतर समय होगा।
तुला: मां के स्वास्थ्य पर ध्यान दें, घरेलू मामले में संयम से काम लें।
वृश्चिक: शुभता में कमी आएगी, पराक्रमी बनेंगे और सफलता मिलेगी।
धनु: धनागमन होगा, जीवन में तरक्की और कुटुंब में वृद्धि संभव है।
मकर: अच्छा और बुरा दोनों संयोग बने रहेंगे, स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता।
कुंभ: खर्च की वजह से परेशानी बढ़ेगी, कर्ज लेने की नौबत आ सकती है।
मीन: सफलता मिलेगी, स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत, आर्थिक संपन्नता आएगी।

Aisi Waisi Aurat ( ऐसी वैसी औरत) | अंकिता जैन | पुस्तक समीक्षा

Aisi Waisi Aurat by Ankita Jain

अंकिता जैन द्वारा रचित कहानी संग्रह “Aisi Waisi Aurat” उनकी प्रथम प्रकाशित पुस्तक है। उनकी यह पुस्तक दैनिक जागरण नीलसन बेस्ट सेलर रही है। इसका प्रकाशन हिंद युग्म प्रकाशन द्वारा मार्च 2017 में किया गया। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2017 से 2019 तक इसके 5 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं।

अंकिता एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है परंतु, लेखन के प्रति झुकाव होने के कारण उन्होंने नौकरी को छोड़ कर अपना पूरा ध्यान लेखन पर केंद्रित कर लिया। उनकी कहानियां एफ. एम के रेडियो शो “यादों का ईडियट बॉक्स” तथा “यूपी की कहानियां” में ऑन एयर हो चुकी है।

उनका कहानी संग्रह “Aisi Waisi Aurat” नारी मन की विवशताओं को लेकर लिखी गई 10 कहानियों का ऐसा संग्रह है जो यह सवाल खड़ा करता है कि क्या समाज ने नारी पर उंगली उठाने से पहले उसके भीतर झांकने और उसे समझने का प्रयास किया है? क्या उसके “ऐसी वैसी औरत” जैसे सवालिया निशान लगाने से पहले उसने उसकी परिस्थितियों और मन स्थितियों का जायजा लिया है? संभवतः नहीं, क्योंकि हम अपने मस्तिष्क पर इतना दबाव डालना ही नहीं चाहते कि वहां तक पहुंच पाएं। अधिकांश स्त्रियों का जीवन ऊपरी तौर पर रंगोंसे सराबोर दिखाई देता है परंतु, उसका एक पक्ष बदरंग भी हो सकता है। इस पर कभी विचार किया ही नहीं गया।

अंकिता जैन ने अपने कहानी संग्रह “Aisi Waisi Aurat” में ऐसी ही 10 औरतों की कहानियां संकलित की हैं जो एक औरत की विषम परिस्थितियों और मजबूरी वश उनसे समझौता करने की कहानी कहती हैं। “मालिन भौजी”, “प्लेटफार्म नंबर 2”, “छोड़ी हुई औरत”, “धूल-माटी-सी जिंदगी”, “गुनहगार कौन”, “70 वें साल की उड़ान”, “रात की बात”, “उसकी वापसी का दिन” आदि ऐसी कहानियां है जिनमें, नारी जीवन के विविध पक्षों को बहुत सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया गया है।”मालीन भौजी” एक ऐसी अकेली महिला की कहानी है जो जीवन को नए सिरे से प्रारंभ करना चाहती है तो “फोन नंबर दो” ऐसी छोटी बच्ची की कथा कहती है जो जिस्मफरोशी के जाल में फंस जाती है।”धूल-माटी-सी जिंदगी” पुरुषों की कामुक दृष्टि उससे पीड़ित महिला की पीड़ा का बयान करती है।

संग्रह की प्रत्येक कहानी एक स्त्री के जीवन के प्रत्येक पड़ाव की वेदना और उसकी मजबूरी को दर्शाती है। स्त्री के रूप में एक छोटी बच्ची से लेकर एक युवती और यहां तक के एक वृद्ध महिला का जीवन भी आसान नहीं होता। कहीं ना कहीं उसके साथ अन्याय होता ही है। इन सभी परिस्थितियों और उनसे जूझने वाली महिलाओं के जीवन के स्याह पन्नों को पाठकों, विशेष रुप से पुरुषों के सम्मुख उजागर करने का एक सफल प्रयास है। अंकिता जैन का यह कहानी संग्रह महिलाओं के जीवन में मील के पत्थर के समान है।

जहां तक उनके लेखन का प्रश्न है उन्होंने संग्रह की भूमिका में ही इसे स्पष्ट करते हुए लिखा है- मैंने कोशिश की है इन कहानियों को उसी भाषा और रूप में लिख पाऊं, जिस रूप में वे मेरे सामने आईं।

“सभी कहानियों को पढ़ने और उसकी भाषा शैली पर विचार करने के उपरांत यह स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने प्रत्येक कहानी युग्मों की लोकप्रियता के कारण में उसके पात्रों तथा उनके व्यक्तित्व के अनुसार ही भाषा का प्रयोग किया है। उनकी दसों कहानियां विभिन्न स्थानों, वातावरणों और पृष्ठभूमि के अनुसार विविध रूप धारण करती हुई दिखाई देतीं हैं। कहानी की आवश्यकता के अनुसार खड़ी बोली, अंग्रेजी और देहाती शब्दों युग्मों की लोकप्रियता के कारण का भी प्रयोग उन्होंने किया है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि कथाकार अंकिता जैन की कहानियों में भाषा वैविध्य सर्वत्र दिखाई देता है।

उन्होंने स्त्री मन की व्यथा को कम से कम शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है। यह कहानी संग्रह उन पाठकों के लिए नहीं है जो विशुद्ध मनोरंजन के लिए कथा साहित्य पढ़ना चाहते हैं। यह एक ऐसे विशिष्ट वर्ग में लोकप्रियता प्राप्त करता आया है जो स्त्रियों के प्रति कोमल भाव रखते हैं और उन्हें जानना तथा समझना चाहते हैं।

अंकिता जैन का कहानी संग्रह नारी के बेरंग और बदरंग पक्षों को समाज के सामने प्रस्तुत करने का एक सफल प्रयास है। “ऐसी वैसी औरत” एक ऐसा कहानी संग्रह है जो किसी भी स्त्री को ऐसा वैसा कहने से पूर्व समूचे समाज को उसके अंतर्मन को समझने और अपनी सोच को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।

यह संग्रह अपने प्रकाशन के साथ ही पाठकों में लोकप्रियता प्राप्त करता आया है और मेरा विश्वास है कि आगामी वर्षों में भी यह लोकप्रियता के नए तूफानों को स्पर्श करेगा।

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