BENIPATTI : अधवारा समूह की नदियों के जल स्तर में मामूली कमी

अब भी कई घरों में जमा है बाढ़ का पानी

आधे दर्जन से अधिक सड़कों पर आवागमन है बाधित

आधा दर्जन से अधिक लोगों की हो चुकी है मौत

पशुचारे की किल्लत बरकरार

बेनीपट्टी : प्रखंड के अधवारा समूह की सहायक नदियों के जल स्तर में शनिवार को मामूली कमी देखी जा रही है. जिससे बाढ़ प्रभावित इलाके के लोग हल्की राहत महसूस कर रहे हैं. लेकिन आसमान में छाये बादल और नेपाल की ओर से आनेवाला संभावित पानी से बाढ़ की स्थिति भयावह होने की आशंका से अब भी नही उबर पा रहे हैं. अब भी कई गांवों में बाढ़ का पानी फैला हुआ ही है और कई घरों से बाढ़ का पानी नही निकल सका है. खेत खलिहान सभी जलमग्न हैं. आधे दर्जन से अधिक सड़कों पर अब भी आवागमन बाधित है. वहीं कुछ टुटाव स्थलों पर नाव का परिचालन कर आवागमन बहाल किया जा सका है.

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सैंकड़ों एकड़ में फैले बाढ़ के पानी में अधिकांश किसानों के धान के बिचड़े नष्ट हो चुके हैं और कुछ जगहों पर धान की फसलें भी डूबकर बर्बाद हो चुकी है. अब तक पानी मे डूबने से आधा दर्जन लोगों की मौत भी हो चुकी है. पशुचारे की किल्लत अब भी बरकरार है. शनिवार को भी कई घरों में बाढ़ का पानी जमा रहने की वजह से लोग दूसरों के घरों में या ऊंचे स्थलों पर शरण ले रखे हैं. खासकर करहारा और बर्री पंचायत नदियों से घिरे होने के कारण बाढ़ के पानी से सर्वाधिक पीड़ित हैं. लडूगामा से भगवतीपुर जानेवाली टूटे भाग में स्थानीय लोगों के द्वारा बांस की चचरी बनाकर तत्काल कामचलाऊ आवागमन बहाल किया गया है.

इसी तरह शिवनगर माधोपुर सड़क में कुछ रोड़े डालकर कामचलाऊ बनाया गया है. लेकिन अब भी चानपुरा से रजबा, माधोपुर से विशनपुर, समदा से सोहरौल, सोइली से गुलरियाटोल करहारा, बेतौना से सोहरौल, त्रिमुहान से सोहरौल, सलहा से पहिपुरा और देपुरा पथ सहित अन्य सड़कों पर पानी जमा है. इसी तरह विशनपुर से बर्री, बर्री से राजघट्टा, राजघट्टा से फुलबरिया, सिरवारा, नवगाही आदि पथों से जान जोखिम में डालकर येन केन प्रकारेण लोग आवाजाही करने को विवश हैं.

उधर समदा, उच्चैठ, धनौजा, सलहा, गंगुली, देपुरा, चतरा व ढंगा आदि अन्य गांव में भी पानी फैला हुआ ही है. जिससे लोग त्रस्त हैं. प्रशासन से गुहार लगाकर लोग थक चुके हैं लेकिन अधिकारी बाढ़ से निबटने की तैयारी के रटे रटाये शब्द के अलावे न तो कुछ कहने को न ही बाढ़ से प्रभावित होने की बात मानने को तैयार दिख रहे हैं. जिन इलाके में बाढ़ के पानी के कारण लोग ऊंचे स्थलों या बांधों पर शरण ले रखे हैं उनकी सुध ली जा रही है न ही पशुचारे उपलब्ध कराने की दिशा में कोई पहल होते दिख रहा है.

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