लोक अदालत में पति-पत्नी में हुआ समझौता, छोटी सी बात से हुआ था झगड़ा, बात तलाक तक पहुंची तो जेल में बंद पति


न्यूज डेस्क : बेगूसराय में एक परिवार की छीनी हुई हंसी खुशी और सुख चैन वापस लौट गयी। जब शनिवार को जिला विधिक जिला विधिक सेवा प्राधिकार के द्वारा आयोजित हुए लोक अदालत में पति पत्नी के बीच उपजे विवाद को खत्म करा एक दूसरे से मेल मिलाप करा दिया गया । इस अवसर पर बेगूसराय के प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार सिंह ने इसका उद्घाटन करते हुए कहा कि “लोक अदालत विवादित पक्षकारों के दिलों को जोड़ने का काम करती है । फिर लोक अदालत ने न सिर्फ दो पक्षों के दिलों को जोड़ने का काम किया बल्कि एक मासूम के भविष्य को भी संवारा।

पांच साल पहले हुई थी शादी है एक पुत्री भी किसी शादी शुदा जोड़े के बीच जब आपसी तालमेल की कमी आ जाती है, तो ऐसे में छोटी छोटी बातों पर विवाद होते है बात कोर्ट कहचरी तक पहुँच जाती है और रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है ऐसा ही मामला लोक अदालत में आया जो मुफ्फसिल थाना के सथुआ टोला खम्हार गाँव निवासी रामनंदन यादव की बेटी सीता देवी और बछवाड़ा थाना के बरहमपुर गांव के रामइकबाल राय का था। इनकी शादी सामाजिक रीति रिवाज के साथ 8 दिसम्बर 2016 को करवाई गई और बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद से इन्होंने अपना दाम्पत्य जीवन शुरू किया और कुछ वक्त बाद ही इनपर ऊपर वाले कि इनायत से एक बच्ची सेजल ने जन्म लिया। लेकिन कुछ वक्त बीतते ही इनके दाम्पत्य पर गहरे बादल छाने लगे और छोटे छोटे विवाद बड़े होने लगें। पारिवारिक स्तर से बात सामाजिक स्तर तक पहुँच गई लेकिन समाधान न मिला। इन सबके बीच इनकी मासूम बच्ची का बचपन छीनने सा लगा। माँ बाप के साथ ममत्व के आँचल तो पितृत्व के सुरक्षा में पलने के बजाए रिश्तों में आ रही दरार की वजह से उसका बचपन पीसने लगा।

पति पत्नी के झगड़े में पति को हो गया था जेल : जब मामला समाज पंचायत भी न सुलझा पाई तब कोर्ट में मुकदमे दर्ज होने लगे और वर्ष 2019 से 2021 तक मे न सिर्फ इनका दाम्पत्य बल्कि एक मासूम की मासूमियत को भी अज़ाब का सामना करना पड़ा। महिला थाना कांड संख्या 3/19 , परिवाद पत्र संख्या 2376/19, भरण पोषण वाद संख्या 36/21 जैसे मामले दर्ज हो गया और नतीजन रामइकबाल को जेल हो गई। पर शनिवार को जब मामला लोक अदालत के परिवार न्यायालय में आया तब प्रधान न्यायाधीश श्री राज किशोर सिंह एवं अन्य वरीय सदस्यों ने दोनों पक्षो के बीच मामले की संजीदगी को देखते हुए तथा बच्ची के भविष्य के लिए दोनों पक्षो में सुलह समझौता करवा कर मामला समाप्त करवाया। न सिर्फ दोनों पति पत्नी के दाम्पत्य को मधुरता से भरा बल्कि इनकी बेटी के भविष्य को भी सार्थक दिशा दी।



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