आपदा पीड़ित परिवारों की सूची अपलोड करने का कार्य अधूरा

रौशन कुमार की रिपोर्ट

बासोपट्टी : आपदा से पीड़ित परिवारों की सूची आपदा संपूर्ति एप पर उपलोड करने का कार्य तय तिथि के बाद भी अधूरा है। आपदा प्रबंधन विभाग व डीएम द्वारा सभी अंचलाधिकारी को पत्र निर्गत कर आपदा पीड़ित परिवारों को ससमय आनुग्रहिक राहत का भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में करने के उद्देश्य से अपलोड करने का आदेश दिया। आपदा पीड़ित परिवार के मुखिया का नाम पूर्ण विवरण आधार सहित के साथ दिनांक 31 मार्च तक एनआईसी के आपदा सम्पूर्ति पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया था।

जो तय तिथि तक अपलोड नहीं किया जा सका। जिसके बाद 11 मई को अपर सचिव आपदा प्रबंधन की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ने यह निदेश दिया गया था कि वैसे सभी वार्ड जो बाढ़ 2017, 2019 एवं 2020 में प्रभावित हुए थे के वैसे परिवार जिन्हें जीआर का लाभ दिया गया था या किसी कारण उनका नाम आपदा सम्पूति पोर्टल पर नाम दर्ज नहीं हो पाया है। जांच कर पोर्टल पर दर्ज कर दी जाए। इसके साथ ऐसे परिवार जिनके कई सदस्यों का नाम अवैध रूप से अलग-अलग परिवार के रूप में पोर्टल पर दर्ज है। उसे भी जांच कर पोर्टल से हटाने की कार्रवाई की जाय। सभी प्रभावित परिवार के मुखिया के नाम उनके आधार कार्ड एवं बैंक की छाया प्रति से मिलान कर सही-सही दर्ज किया जाय ताकि जीआर के भुगतान में डुप्लीकेसी एवं अवैध भुगतान से बचा जा सके।

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साथ ही पत्र के माध्यम से यह भी बताया गया कि बाढ़ के समय में यह ध्यान रखना आवश्यक होगा की उसी परिवार को आपदा सम्पूर्ति पोर्टल के माध्यम से जीआर का भुगतान किया जायेगा जो वास्तविक रूप से बाढ़ प्रभावित हुए हैं। जो परिवार प्रभावित नहीं हुए है और उनका नाम सम्पूर्ति पोर्टल पर दर्ज है तो उनका नाम हटाकर पंचायत, प्रखंड अनुश्रवण समिति से पारित कराकर जीआर का लाभ पीड़ित परिवार को ही दिया जाएगा। लेकिन डीएम द्वारा जारी पत्र के विपरीत अंचलाधिकारी द्वारा सभी पंचायतों के मुखिया व वार्ड सदस्य के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों का डिटेल जमा किया जा रहा है।

वही वैसे परिवार जिनको बाढ़ राहत नहीं मिल सका उनका नाम जोड़ने का काम नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण क्षेत्र के लोगों में मायूसी है। पीड़ितों द्वारा तत्कालीन सीओ सुमन सहाय के समय बैंक व आधार की छायाप्रति भी जमा किया गया था। लेकिन कार्यालय में उन कागजातों का बंडल बना कर कहीं रख दिया गया। जिसके कारण अन्य पीड़ित लोग राहत से वंचित रह गए। 

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